hindi, humour, Poem

Kharbooje ne jo rang pakda

Below poem i had written for two people falling in love, this piece was written on 23rd march (holi)

खरबूजे ने जो रंग पकड़ा

वाह वाह खरबूजे ने जो तरबूजे का रंग यूँ पकड़ा रंगीन हो गया माहौल सारा
बात बात में जो बात वो यू जाने सब कुछ इतनी जल्दी जाने पहचाने

इतनी जल्दी कोई घुसपैठ कैसे कर सकता है तुम तो लगे रंग ज़माने और धूम मचाने
जैसे कोई मचलने को बेकरार कोई और बात बात मे ढूंढे कई बहाने

पर हम तो चले नहाने, भीग गए इस रंग में पर चाह कर भी ना छुड़ा पाए
इस रंग को रखूं अपने दिल और दिमाग मे यू प्रतिबिम्बित की बेचारे कही ना हो जाये निलंबित

कहा खूब तरबूज ने “जहाँ न पहुंचा कवि वहां पहुँच गए श्रीमान कवि ”
तो अब कवि की कल्पना को उड़ने दो। खरबूजे पे तरबूजे का रंग चढ़ने दो…हमे भी थोड़ा मचलने दो

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