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Ghasita Coder Poem

यह कविता सत्य घटनाओ पर आधारित है!

तथा इस कविता के पात्र काल्पनिक नहीं, किन्तु वास्तविक हैं ।

प्रस्तुत है कविता
“घसीटा कोडर”

अरे भाई, अरे भाई
जरा देखो, देखो एक घसीटा कोडर कोडींग करता जा रहा है,
दुनिया की उसे कोई सुध बुध नहीं की कोड भी फटा जा रहा है!

कुछ फटा! कहा फटा ? क्या फटा ? क्या पता ?
ये किसे पता ? मुझे भी नहीं पता, और जिसे पता वो लापता
404!

दूध का जला, बिल्ड को जलाकर, कोड को फूँक फूँक कर पिये जा रहा है!
एक खिडके से दूसरी खिड़की मे, एक हाथ कंट्रोल सी और दूसरा हाथ कंट्रोल वी पर रख
अपनी अंगुलियों का जादू दिखाए जा रहा है!

कोड की परत दर परत, कोड की परत दर परत पर
अपनी पुरानी गलतियों को नया नया मेकअप लगा,
नई सभ्यता के विकास की सोच को बुलंद! किये जा रहा है।

प्रोजेक्ट मेनेजर!
प्रोजेक्ट मेनेजर रोटी, कपडा और मकान और बढती हुई महंगाई से सिर पर
निकले हुए चाँद की दुहाई देकर
घसीटो को झाड़ के पेड़ पर चड़ाए जा रहा है!

पुरानी बोतल पर नया लेबल लगा,
50 प्रतिशत छुट, 50 प्रतिशत छुट
का नारा बुलंद किये हुए, अपना गला सुखाये जा रहा है!

डेमो आया, डेमो आया की घुट्टी को मुगली घुट्टी 555 मे तब्दील कर,
जुगाड़ कोड की सलामती के लिए, टेम्पल रन मे अपनी नाक रगड़ता हुआ पकड़ा जा रहा है!

लेकिन!
लेकिन! इतना सब कुछ होने के बावजूद क्लाइंट के डेमो दरबार मे,
वाह वाही लूट सारे मेडल्स अपनी फटी झोली मे फिट किये जा रहा है! (और आज तो मेडल्स लटकाते हुए भी पाया गया था!)

और 9 घंटे की इस फ्लेक्सिबल गोलाबारी मे, अपना थोडा बहुत योगदान करके
2018 का लक्ष्य, 500 मिलियन विदेश मुद्रा को अर्जित करने का सकंल्प
और इस सपने को पूरा करने का सपना संजोय,
सिस्टम शटडाउन कर, बिजली बचाओ, देश को आगे बढाओ
का सन्देश देकर, यहाँ से रफूचक्कर होने जा रहा है!

ओके बाय, बाय साइनिंग आउट!

✿✿✿✿✿✿✿

Must say, the audience really have big heart. The cheer me up while i was performing and was evident that they were stunned, if some one can write the same on them and also present to them, face to face.

The point i have with this poem, is actually i have set up certain goals and objectives which i am looking to execute them out with organizational goals, with my whatever small or little goals as addon to them.

To really move up and to gain the phenomenal level of altitude a rocket needs well propelling booster!

If the world has a dream, will love to be a part of it, whatever i can do to fulfill them.
Because turning the dream into a reality, is worth a life we can live into the dreams.

Signing Out! BEEP!

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humour, life, Uncategorized

Days @work

Thought to share with all of you!

The Days at work

Sunday – Sun charge your exhausted batteries

Monday – You moan about work.

Tuesday – Squeeze day.

Wednesday – You wed with the work. GOSH!

Thursday – Work thrashes you.

Friday – You being Fried. Ehh! ha ha! WTF! (Wednesday, Thursday and Friday)

Saturday – Ah! you sat and relax.

And the cycle continues…

Hey!  heck it is Friday and I have fried this post 😀

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